वामपंथियों का खिलौना बनकर रह गया वि.वि.

0
173

बुरा जो देखन मैं चला….।

राम मोहन चौकसे

पूरे देश में 10 रुपये दिन की दर से किराए का कमरा
नहीं मिल सकता है।इसके साथ ही 20 रुपये माह के खर्च पर दो वक्त का खाना कहीं भी नहीं मिल सकता है।हमारे देश मे एक ऐसी जगह है।जो होटल अथवा भोजनालय नही,विश्वविद्यालय है।यह विश्वविद्यालय दिल्ली में स्थित है,जिसका नाम जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय है।इस विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य जवाहर लाल नेहरू के विचारो का संरक्षण करना था।स्थापना के चंद वर्षों में ही यह विश्वविद्यालय अपने उद्देश्य से भटक गया,और वामपंथियों की नर्सरी बनकर रह गया।वामपंथी विचार धारा का मूल उद्देश्य देश की सभ्यता,संस्कृति का विरोध कर विष वमन करना है।

1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने पिता जवाहर लाल नेहरू के विचारों की विरासत को संरक्षित रखने के लिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना की।इसके पीछे एक सौदा था क्योंकि इंदिरा गांधी की सरकार साम्यवादी पार्टी के समर्थन पर थी।साम्यवादी विचारधारा वाले सैय्यद नुरुल हसन शिक्षा मंत्री थे। 22 अप्रेल 1969 में जे एन यू(जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय) की स्थापना के बाद से ही यह विश्वविद्यालय विवादों में आ गया।इतिहास और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर वामपंथी थे।जो अपने साथ वामपंथी विचारधारा वाले शिष्यों की बड़ी खेप समेट लाये थे। जे एन यू के पहले कुलपति पत्रकार,क्रिकेटर,राजनयिक जी.पार्थसारथी थे।जो 28 अप्रेल 1969 से 27 अप्रेल 1974 तक कुलपति रहे। 1019 एकड़ क्षेत्र में फैले इस वि वि में 10 स्कूल्स,4 विशेष केंद्र हैं।छात्र-छात्राओं के 18 छात्रावास तथा विवाहित छात्र-छात्राओं के लिए एक काम्प्लेक्स है। जे एन यू 6 रक्षा संस्थान, 12 शोध एवं विकास संस्थान से सम्बद्ध है।जे एन यू में अभी लगभग साढ़े सात हजार छात्र अध्यनरत हैं।

जे एन यू में सोशल सिस्टम्स,एनवायरल साइंसेस,लाइव साइंसेस,परफार्मिंग आर्ट्स,कम्प्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ इन्टरनेशनल्स स्टडीज और अलग- अलग भाषाओं के अलग-अलग स्कूल स्थापित किए गए। यहां छात्र-छात्राएं वार्षिक परीक्षा के आतंक से मुक्त हैं। देश मे सबसे पहले सेमेस्टर प्रणाली यहीं से शुरू हुई। पहले 7-8 छात्रों पर एक शिक्षक हुआ करता था,अब 15 छात्रों पर एक है। जे एन यू देश की अकेली यूनिवर्सिटी है,जहां नकल के खिलाफ कोई कानून नहीं हूं। गधे से गधा छात्र भी किताब से नकल कर डिग्री लेकर ही निकलेगा।परीक्षा में तीन घंटे की जगह छात्र को मर्जी से उत्तर लिखने की छूट है। शिक्षकों की जांची कापियां छात्रों को देखने का अधिकार है।पूरे साल भर कक्षा में उपस्थिति की अनिवार्यता भी नहीं है।

इंदिरा गांधी ने अपने मंसूबे पूरे करने के लिए जे एन यू की स्थापना की थी। जे एन यू के छात्रों ने 1975-77 में इंदिरा गांधी के खिलाफ बगावत की।यहां के छात्र छात्राओं ने आपातकाल का जमकर प्रतिरोध किया। कारावास भी भोगा। जे एन यू के सरकार विरोधी तेवर आपातकाल के आंदोलन की विरासत है। दुर्भाग्य से 1975 से अनुशासनहीन स्वछंदता,उच्छ्रंखलता और अवसरवादी अराजकता ने जे एन यू में अंगद की तरह पांव पसार लिए। छात्रों की अनुशासनहीनता और उच्छ्रंखलता के चलते छात्रों के आंदोलन के कारण 1983 में शून्य सेमेस्टर घोषित कर जे एन यू को बंद भी करना पड़ा।

अब देश के खिलाफ किसी भी आंदोलन की शुरुआत जे एन यू से ही होती है। जे एन यू के साथ अब जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी,अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का भी नाम जुड़ गया है।इन तीनों विश्वविद्यालयों में छात्र पढ़ने नहीं देश के खिलाफ राजनीति करने आते है। जे एन यू ही ऐसा संस्थान है,जहां 60 साल की उम्र का बुजुर्ग भी अध्ययन करता है।कारण सिर्फ यही है कि 10 रुपये के किराए पर छात्रावास में कमरा और 20 रुपये माह के खर्च पर होस्टल की मेस में भरपेट भोजन मिलता है।सैकड़ों ऐसे उदाहरण है जब जे एन यू में देश विरोधी नारे लगाकर आंदोलन किये गए। जे एन यू अब अध्ययन का केंद्र की जगह ऐशगाह और वामपंथियों का गढ़ बनकर रह गया है।
(लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here