कांग्रेस की मदहोशी का भाजपा को फायदा मिलेगा

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बुरा जो देखन मैं चला….

– कांग्रेस की मदहोशी का भाजपा को फायदा मिलेगा
– गुर्जर समाज की नाराजगी भी भारी पड़ेगी

राम मोहन चौकसे

ram-mohamn-choukseyमध्यप्रदेश में 27 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को कांग्रेस की मदहोशी,आपसी गट बाजी,छोटे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का भरपूर फायदा मिलेगा। कांग्रेस को गुर्जर समाज की नाराजगी भी भारी पड़ेगी।दरअसल गुर्जर समाज की नाराजगी राजस्थान में 19 दिन से चल रहे अशोक गहलोत विरुध्द सचिन पायलट के सियासी दंगल को लेकर है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटवा दिया।सचिन पायलट के समर्थक विधायकों को कानूनी दांवपेच में उलझा दिया।इतना ही नहीं अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को सार्वजनिक मंच से नाकारा,निक्कमा भी कह दिया।सचिन पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.राजेश पायलट ,पूर्व सांसद रमा पायलट के पुत्र हैं। सचिन जनाधार वाले गुर्जर समाज के सर्वमान्य नेता हैं।मप्र के गुर्जरों का राजस्थान के गुर्जरों से रोटी-बेटी के सम्बंध हैं।मप्र का चंबल सम्भाग राजस्थान की सीमा से जुड़ा है।
मप्र में सितम्बर माह में होने वाले सम्भावित उपचुनाव ग्वालियर,ग्वालियर पूर्व, मुरैना, अम्बाह, भांडेर, अशोक नगर,डबरा,सांची,सांवेर,पोहरी, बमोरी,मेहगॉंव, गोहद,दिमनी,करैरा, सुरखी,मुंगावली,बदनावर,हाटपिपल्या,अनूपपुर, सुवासरा,बड़ा मलहरा, नेपा नगर,मांधाता विधानसभा क्षेत्र में होना है।इन विधानसभा क्षेत्रों से गोविंद राजपूत, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी,प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, राज्य वर्धन सिंह, ओ पी एस सिसोदिया, गिर्राज दंडोतिया, सुरेश धाकड़, बिसाहू लाल सिंह, हरदीप सिंह डंग, ऐंदल सिंह कंसाना अभी मंत्री हैं।इन मंत्रियों सहित रघुराज कंसाना,कमलेश जाटव,रक्षा सिसोदिया,जजपाल सिंह जज्जी,रणवीर जाटव, मुन्नालाल गोयल,ब्रजेन्द्र सिंह यादव, मनोज चौधरी,प्रद्युम्न सिंह लोधी,सुमित्रा कासडेकर, तथा नारायण सिंह पटेल को भी चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा।
उपचुनाव के लिए भाजपा अपनी रणनीति बना चुकी है। विधानसभा क्षेत्रों की चुनाव प्रबंधन समिति गठित हो चुकी है।चुनाव लड़ने वाले भाजपा उम्मीदवार(पहले कांग्रेस विधायक)अपने क्षेत्र में एक बार दौरा कर चुके है।कांग्रेस में मप्र के नए प्रभारी मुकुल वासनिक के दो दिवसीय दौरे पर गहमा-गहमी दिखाई दी थी।अब कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में कुछ वाहनों,पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं की आवाजाही ही रहती है।पूर्व मुख्यमंत्री,कांग्रेस अध्यक्ष एवं सम्भावित नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ कांग्रेस कार्यालय कर्ज मुक्ति की तर्ज पर महीने में एकाध बार जाते हैं।कांग्रेस महामंत्री राजीव सिंह, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी,भूपेंद्र गुप्ता कांग्रेस के सक्रिय होने का एहसास कराते रहते है।सांसद दिग्विजय सिंह,अरुण यादव,सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल,गोविंद सिंह,कुणाल चौधरी जैसे सक्रिय नेता परिदृश्य से गायब हैं।
कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद सक्रिय पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं की फौज लापता हैं।जो सक्रिय है,उन्हें कोई पूछ नही रहा है।अब चुनाव की पूरी कमान अपने हाथ मे लेने से कमलनाथ से कार्यकर्ता नाराज है। वैसे भी कमलनाथ को मीडिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से एलर्जी है।सत्ता पक्ष को पटखनी देने के लिए विपक्ष का मजबूत और चाकचौबंद होना जरूरी है।कांग्रेस मानकर चल रही है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा उनके समर्थक विधायकों के भाजपा में शामिल होने का बदला आम मतदाता जरूर लेगा।कांग्रेस ऐसे मुगालते में लम्बी चादर तानकर सो रही है। 27 विधान सभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव में मतदाताओ की संख्या 18 लाख से ज्यादा है।कांग्रेस को किला फतह करने के लिए पुराने वजनदार नेताओं को चुनाव की बागड़ोर देना होगी।कमलनाथ को सभी पद अपने पास रखने का मोह छोड़ना पड़ेगा।कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का जतन करना पड़ेगा कांग्रेस की मदहोशी से भाजपा की फायदा मिलेगा,इसमें शक नहीं है।

राम मोहन चौकसे
प्रधान संपादक “समरस”, भोपाल ।

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