लेकिन,किंतु, परन्तु से उबर गए शिवराज

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बुरा जो देखन मैं चला….

राम मोहन चौकसे

ram-mohamn-choukseyमध्यप्रदेश में चौथी बार मुख्यमंत्री की गद्दी सँभालने वाले शिवराज सिंह चौहान इस बार की पारी नए तेवरों के साथ खेल रहे हैं।लेकिन,किंतु,परन्तु के सवालों से उबर गए है शिवराज सिंह चौहान।मुख्यमंत्री की कुर्सी अब गई,तब गई कि भविष्यवाणी करने वालों को अब मुंह की खानी पड़ी है।

तीन बार मप्र के मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में घटित हुए तूफानी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस की अल्प मत में सरकार आने पर 24 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री की शपथ ली।कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया केे साथ कट्टर 22 विधायकों के इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल होने के बाद यह भूचाल आया था।शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे समय मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था जब वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरे देश सहित मप्र को अपने शिकंजे में ले लिया था।मुख्यमंत्री की शपथ लेने के 3 घण्टे बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर महामारी से युद्ध स्तर पर लड़ने का फैसला लिया। इंदौर,भोपाल,जबलपुर,खरगोन,खंडवा,रायसेन,बुरहानपुर की स्थिति भयावह थी।सबसे बुरी हालत इंदौर,भोपाल ,जबलपुर की थी।शिवराज सिंह चौहान ने लगातार एक माह तक स्थिति पर नजर रखी।सुबह,दोपहर शाम मुख्य सचिव,कलेक्टर्स से जिलों में सर्वे,सेनेटाइजर छिड़काव,जांच , इलाज की जानकारी ली।कलेक्टर ,अधिकारी बदले।धीरे धीरे कुछ राहत मिली।

सरकार के नाम पर सिर्फ अकेले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के होने के कारण कांग्रेस ने वैधानिक सवाल खड़े करना शुरु कर दिए।एक माह बाद 5 विधायको नरोत्तम मिश्रा,तुलसी सिलावट,गोविंद राजपूत,कमल पटेल तथा मीना सिंह ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। 5 मन्त्रियों वाली सरकार पर कांग्रेस ने संख्या बल के अनुपात में मंत्री नही बनाने पर फिर सवाल उठाना शुरू कर दिए।हाई कोर्ट की भी शरण ली। 2 जुलाई को सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों तथा भाजपा के 28 विधायकों ने कैबिनेट और राज्य मंत्रियों की शपथ ली।

मंत्रिमंडल के गठन के बाद विभाग वितरण भी 9 दिन लटका रहा।कांग्रेस ने प्रचार किया कि भाजपा के विधायकों की नाराजगी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को मलाईदार विभाग नही मिलने पर सरकार गिर जाएगी।कुछ राजनीतिज्ञों ने मध्यावधि चुनाव की आशंका जता दी।शिवराज सिंह चौहान ने संगठन और बड़े नेताओं से मशवरा कर विभागों का वितरण कर दिया।कहीं कोई विरोध के स्वर नही गूंजे।

230 सदस्यों वाली विधानसभा में दो विधायकों की मौत ही चुकी है।पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायकों तथा बाद में दो कांग्रेस विधायकों प्रद्युम्न लोधी तथा सुमित्रा कासडेकर के इस्तीफा देने व भाजपा में शामिल होने के बाद 26 सीटों पर उपचुनाव होना है।सम्भावना है कि सितम्बर माह में उपचुनाव होंगे।मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदेश के ख़ाली खजाने को भरने तथा उपचुनाव में भाजपा का परचम फहराने की बड़ी चुनौती है।

भाजपा सरकार अभी तक 1750 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 31 मार्च 2020 तक मप्र पर 1.80 लाख करोड़ का कर्ज था। जुलाई में आहूत विधानसभा सत्र में बजट पेश होना था।कोरोना महामारी के चलते सर्वदलीय बैठक के फैसले के बाद विधान सभा सत्र को स्थगित किया गया।मप्र में भाजपा के 107,कांग्रेस के 88,बसपा के 2,सपा के 1 तथा 4 निर्दलीय विधायक हैं। 26 सीटों पर उपचनाव होने की स्थिति में भाजपा को बहुमत मिलने की संभावना है।कारण भी साफ है कि कांग्रेस में ऐसा कद्दावर नेता दिखाई नही दे रहा है जिसकी दम पर चुनाव लड़ा जा सके।पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ही अध्यक्ष,उपचूबाव के सारथी, सम्भावित नेता प्रतिपक्ष हैं।कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों से मिलने में उन्हें गुरेज है।कांग्रेस में फूट इस कदर है कि कांग्रेस के नेताओं में भाजपा में जाने की होड़ लगी है।गुट बाजी और उपेक्षा से दुःखी होकर ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में शामिल होना पसन्द किया।

चौथी पारी में बदले तेवरों का परिचय देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने माफिया का सफाया करने की मंशा जताई है।बालिकाओं के साथ दुराचार होने पर दुराचार करने वालों के खिलाफ फांसी की सजा दिलवाने का संकल्प दोहराया है।दुराचारी शासकीय सेवकों को बर्खास्तगी का रास्ता दिखाया है। मीडिया की आड़ में टैक्स चोरी करने वालों,जिस्मफरोशी करने वालो,सरकारी जमीन हथियाकर भवन बनाने वालों को जेल पहुंचाया है।अच्छा काम करने वाले शासकीय कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की शुरुआत की है।कोरोना महामारी के प्रकोप से निपटने की प्राथमिकता के साथ प्रदेश की खुशहाली के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दृढ़ इच्छा शक्ति जताई है।

राम मोहन चौकसे
प्रधान संपादक “समरस” ,भोपाल

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