दोबारा अब कोई मामू पैदा नहीं होगा

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हर ताले की चाबी थे हमीद खान
दोबारा अब कोई मामू पैदा नहीं होगा

राम मोहन चौकसे

अच्छा और सच्चा जनसम्पर्क अधिकारी वह होता है जो अपनी संस्था की क्रिया कलापों को सकारात्मक नजरिए से प्रचारित करने में सफल हो।उसकी संस्था और मीडिया जगत से सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करते हुए संस्था की यश गाथा लिखवाने में प्रवीण हो।नगर निगम के पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी हमीद खान ऐसे ही सफल अधिकारी थे।हमीद खान साहब ने 22 जुलाई को दुनिया से विदाई ली।

बेहतरीन काबिल,हंसमुख,मिलनसार,कर्मचारियों के हमदर्द, नेक इंसान हमीद खान ने नगर निगम में 32 साल जनसम्पर्क अधिकारी का सफलतापूर्वक दायित्व निभाया।इसके अतिरिक्त नगर निगम के चार विभागों का दायित्व भी निभाया। बाबूलाल गौर,तनवन्त सिंह कीर जैसे नगरीय प्रशासन मंत्री हो।विवेक ढांड, डी के तिवारी,गुलशन बामरा,मनीष सिंह जैसे आयुक्त हो।उमाशंकर गुप्ता,दीपचंद यादव,मधु गार्गव जैसे महापौर हो।हमीद खान सबके चहेते पी आर ओ रहे। नगर निगम में बेशक अधिकारियों की लंबी फ़ौज रही हो।समस्या की सुनवाई से लेकर समाधान की जिम्मेदारी हमीद खान की होती थी।चाहे मामला पेयजल,सड़क,बिजली, सफाई, स्वागत सत्कार, दवा के छिड़काव,वाहनों की व्यवस्था अथवा बेगार की हो।हमीद खान की पुकार होती थी।

1987 से लेकर 90 के दशक तक नवभारत के लिए नगर निगम की रिपोर्टिंग के दौरान हमीद खान के सम्पर्क में आने का मौका मिला।वे हमारे अभिन्न मित्र बन गए।मरते दम तक यह रिश्ते बने रहे। वह जब भी मिले।तपाक से मिले, मोहब्बत से मिले। नगर निगम के खिलाफ खबर नही छप सके,ऐसी कला में वे माहिर थे।मीडिया जगत के वरिष्ठ और कनिष्ठ से उनके सम्बन्ध थे।अखबार मालिको से भी उनके ताल्लुकात थे।सभी सम्बन्ध न सिर्फ बखूबी निभाते थे वरन सम्बन्धों की मर्यादा का पालन करते थे। मामू के नाम से मशहूर हमीद खान के भोपाल के सभी वर्गों की अजीम हस्तियों से निजी ताल्लुकात थे।मेरे नजर में हमीद खान का नाम भारत के बेहतरीन जनसम्पर्क अधिकारियों में शुमार था।आओ प्यारे का तकिया कलाम इस्तेमाल करने वाले हमीद खान ने शताधिक लोगों को रोजी रोटी के लिए नगर निगम में नौकरी लगवाकर उनके परिवार को स्थायी साधन उपलब्ध कराया है।

नगर निगम के खिलाफ खबर छपने पर सम्बंधित मीडिया कर्मी से झगड़ने की जगह हंसकर कह दिया करते थे,मियां आप हमें फाँसी पर टांग दीजिए।आप कहे तो नौकरी से त्यागपत्र दे दे।स्वागत सत्कार में अव्वल हमीद खान अधीनस्थ कर्मचारियों के लिए बड़े अधिकारी से लड़ लिया करते थे।एक साथ एक दर्जन मीडिया कर्मियों को सामने बैठाकर उन्हें हंसते हुए विदा करने की कला सिर्फ हमीद खान ही जानते थे।सेवानिवृत होने के बाद हमीद खान ने वर्षो पुराने दैनिक आलोक का टाइटल खरीद लिया था।ऐसे हरदिल अजीज मित्र,जनसम्पर्क अधिकारी के निधन पर बेहद दुःख हुआ।उन्हें विनम्र श्रद्धाजंलि।

बड़े गौर से सुन रहा था जमाना
तुम्हीं सो गए दास्तां कहते कहते

राम मोहन चौकसे
प्रधान संपादक “समरस”, भोपाल

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