भाजपा में आस्तीन के सांपों की तलाश जारी

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बुरा जो देखन मैं चला,,,,।
भाजपा में आस्तीन के सांपों की तलाश जारी
राम मोहन चौकसे
भोपाल: विगत दो माह पूर्व सम्पन्न हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,राजस्थान में हुई करारी हार के बाद हार के कारणों का तेजी से पता लगाया जा रहा है। हार के कारण भाजपा के संगठन स्तर पर, निजी स्तर पर तलाशे जा रहे हैं।भाजपा के हारे हुए प्रत्याशी भी आस्तीनों के सांपों को तलाश रहे हैं।मप्र के विधान सभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाले सूत्र वाक्य माफ करो महाराज,हमारे तो शिवराज परोसने वाले ज्ञानी पुरुष की खोज कर ली गई है। इस स्लोगन के जनक की हैसियत दस साल पहले भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता जैसी थी।राजनीति में कहा जाता है पॉलिटिक्स स्टैंड ऑन टिप आर टॉप ।इसका सामान्य सा अर्थ है कि राजनीति में फक्कड़ अथवा शीर्ष पर रहने वाला ही मुकाम बनाता है।मध्यमवर्गीय कार्यकर्ता जिंदगी भर दरी उठाते हुए विधायक,सांसद, मंत्री बनने का ख़्वाब देखते हुए दुनियां से कूच कर जाता है।उम्र के आखरी दौर में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मेहरबानी से मध्यमवर्गीय कार्यकर्ता को किसी निगम ,मंडल में अध्यक्ष,उपाध्यक्ष मनोनीत कर मंत्री का दर्जा देकर उपकृत कर दिया जाता है।स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी के दौर के नेता गिरिराज किशोर,भरत चतुर्वेदी जैसे दर्जनों नेता इसका उदाहरण है।गिरिराजकिशोर को 75 वर्ष पूरे होने पर खनिज निगम का उपाध्यक्ष बनाया गया था। बात विधानसभा में भाजपा को डुबोने वाले सूत्र वाक्य माफ करो महाराज, हमारे तो शिवराज के जनक छुटभैया नेता की हो रही है।चमत्कारिक रूप से यह छुटभैया नेता सामान्य कार्यकर्ता से रातों रात प्रदेश स्तर का पदाधिकारी और भाजपा का अधिकृत वक्तव्य देने वाला पदाधिकारी बन गया। प्रदेश के एक बड़े ठेकेदार की चापलूसी ने ही इस छुटभैया नेता को फर्श से अर्श पर बैठा दिया।इस ठेकेदार की भाजपा सरकार में तूती बोलती थी। प्रदेश के चंद आला अफसर और चंद मंत्री ठेकेदार की ड्योढ़ी पर हाजरी लगाने आते थे।भाजपा के चहेते ठेकेदार के मुँहलगा छुटभैया नेता भी भाजपा में बड़ा नेता बन गया।भाजपा में वर्षों तपस्या करने वाले किसी वरिष्ठ नेता ने कभी विरोध करने की जुर्रत की,तो बड़े ठेकेदार के माध्यम से भाजपा संगठन के नेताओं,मंत्रियों ने अनुशासन का पाठ पढ़ा दिया। प्रदेश के बड़े ठेकेदार के चहेते इस छुटभैया नेता का दस साल में इतना दखल बढ़ गया कि विधानसभा चुनाव में प्रेस वक्तव्य,स्लोगन, नारे, पोस्टर, बैनर की परिभाषा उसकी मर्जी के बिना जारी नहीं हो सकती थी।सिर्फ इतना ही नहीं भाजपा सरकार में जिला स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों में हजारों वर्गफुट के ए सी वाले मंच,शाही शामियाने,वी आई पी सोफे,कुर्सियों, कनातों की व्यवस्था करने,परिवहन के लिए हजारों वाहनों की व्यवस्था करने,लाखों कार्यकर्ताओं के नाश्ता, भोजन,पेयजल,पुष्प सज्जा, फूलमालाओं की व्यवस्था करनेे के लाखों रुपये के ठेके इस छुटभैया नेता के लोगों को मिलते थे।इन सम्मेलनों के प्रचार,प्रसार स्मारिका, पर्चे,पोस्टर, काट आउट,बैनर के ठेके ऐसे लोगों को मिलने लगे,जिनके यहां सात पीढ़ियों में ऐसे कार्य कभी नहीं होते थे।जनसंपर्क विभाग में पदस्थ राक्षसी हंसी हंसने वाला अनपढ़ अधिकारी भी छुटभैया नेता का खास बन गया। जनसंपर्क विभाग के इस अधिकारी और छुटभैया नेता की जुगलबंदी ने सरकार को करोड़ों का चूना भी लगाया। 2016 में उज्जैन में सम्पन्न हुए सिंहस्थ पर्व के लाखों के घोटाले में भो इन दोनों का नाम उछल चुका है।जनसंपर्क का राक्षसी हंसी हंसने वाला बदसूरत अधिकारी एक मंत्री और वल्लभ भवन में बैठने वाले बड़े अधिकारी का गुलाम था। पिछले विधान सभा चुनाव में बड़े ठेकेदार के चरण सेवक छुटभैया नेता और जनसंपर्क के घटिया मानसिकता वाले अंग्रेजी भाषा मे शून्य इस अधिकारी ने दोयम दर्जे के स्लोगन, नारे,अनर्गल प्रलाप वाले पर्चे,बैनर बनवाये। भाजपा के नेताओं ने आपत्ति ली,तो अति वलिष्ठ मंत्री ने उनकी आवाज दबा दी। चुनाव में माफ करो महाराज ,हमारे तो शिवराज वाले नारे को भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं,भाजपा के प्रति सहानुभूति रखने वाले मतदाताओं ने भी अमान्य कर दिया।बाकी कसर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के माई के लाल की ललकार ने पूरी कर दी। भाजपा के बागी कार्यकर्ताओं,नेताओं,पूर्व मंत्रियों,विधायकों ने चुनाव में भाजपा को हराकर ही दम लिया।पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, सरताज सिंह,कुसुम मेहदेले जैसे नेताओं ने भाजपा से बदला के लिया।पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर तो टिकट वितरण में पक्षपात का आरोप लगा चुके हैं।लोक सभा चुनाव के पूर्व भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर अपनी ढपली पर बगावत का राग गा रहे हैं।,, लेखक मप्र के वरिष्ठ और स्वतंत्र पत्रकार हैं,,

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