विरोध के लिए सेना पर अंगुली उठाना जायज नहीं

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बुरा जो देखन मैं चला,,,,,।
विरोध के लिए सेना पर अंगुली उठाना जायज नहीं
राम मोहन चौकसे

भोपाल। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत मे विचारों की अभिव्यक्ति का सभी देशवासियों को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।विचारों की अभिव्यक्ति की आड़ में चंद लोगों ने आजकल अपनी राजनीति चमकाने का धंधा शुरू कर दिया है। यह लोग घटिया और ओछी मानसिकता वाले बयान जारी कर देश की जड़े हिलाने का काम कर रहे हैं।अभिव्यक्ति की आड़ में देश विरोधी बयानों की बाढ़ सी आ गई है। राजनीति में विरोध करना बुरा नहीं माना जाता है।संविधान के दायरे में तर्कसंगत विरोध उचित होता है।संविधान का उल्लंघन कर कुतर्क सहित विरोध अपराध की श्रेणी में आता है।

राजनैतिक दलों के संगठित गिरोह का दुस्साहस इस सीमा तक बढ़ गया है कि अब सेना का विरोध किए जाने लगा है।विभिन्न दलों के नेता विरोध करने की लालसा में यह भी भूल गए कि उनके विरोध से दुश्मन देश पाकिस्तान को बल मिल रहा है।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान सहित आतंकवादी संगठनों के सरगना हाफिज सईद,मसूद अजहर जैसे लोग भारत के विरोध करने वालों नेताओं का हवाला देकर दावा करते हैं कि भारत का विरोध करने वाले नेता उनके काम को जायज ठहरा रहे हैं।

देश के बड़े राजनैतिक दल भाजपा का कांग्रेस सहित सपा, बसपा,तृणमूल कांग्रेस,कम्युनिस्ट पार्टी एवं अन्य दल वर्षों से विरोध कर रहे हैं।कांग्रेस सहित अन्य दलों के विरोध से किसी को आपत्ति नहीं है।आपत्ति इस बात पर है कि अब विरोध सेना की कार्यप्रणाली को लेकर उठाया जाने लगा है।सेना के शौर्य,पराक्रम का सबूत मांगा जा रहा है।कांग्रेस सहित तथाकथित प्रगतिवादी लोगों में विरोध का स्वर बुलंद करने वालों में वह 40 लोग भी शामिल हैं,जिन्होंने आतंकवादी याकूब मेनन को फांसी दिए जाने के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।रात को तीन बजे सुप्रीम कोर्ट खुलवाकर सुनवाई करवाई थी।इन 40 लोगों ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद द्वारा किये गए कार बम विस्फोट में 13 फरवरी को मारे गए सी आई एस एफ के 45 सैनिकों की शहादत पर आज तक अफसोस नहीं जताया है।श्रधांजलि नहीं दी है।पाकिस्तान का विरोध नहीं जताया है।

इन लोगों में कम्युनिस्ट नेता वृन्दा करात,प्रकाश करात,भाजपा के बागी नेता शत्रुघन सिन्हा, वकील राम जेठमलानी,फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट,शाहरुख खान,आमिर खान,सैफ अली खान,डरा हुआ अभिनेता नसरुद्दीन खान,काले हिरण का शिकार करने वाला सलमान खान,आप पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल, तीस्ता सीतलवाड़,कांगेस नेता दिग्विजय सिंह,चारा कांड का आरोपी लालू यादव,सपा नेता अबू आजमी,अखिलेश यादव,आजम खान, अकबरुद्दीन ओबेसी,असदुद्दीन ओबेसी,सचिन पायलट,राहुल राय, जरनैल सिंह,अलका लांबा,आशुतोष,सागरिका घोष,करीना कपूर खान,सानिया मिर्जा,शाजिया इल्मी,अहमद बुखारी,अभय दुबे,जहरीला पत्रकार रविश कुमार,पूण्य प्रसून वाजपेयी,ममता बनर्जी,सिद्धारमैया,आशीष खेतान,नीतीश कुमार,स्वामी अग्निवेश,संजय सिंह तथा शकील अहमद शामिल है।यह सभी अपने आपको धर्म निरपेक्ष मानते हैं,लेकिन भाषा देश विरोधी बोलते हैं।

यह मान भी लिया जाए कि भाजपा के बड़े नेता नरेंद्र मोदी की रीति, नीति,कार्य शैली,भाषण शैली,पहनावा,विदेश यात्रा,देश हित में लिए फैसले,खान पान से कांग्रेस सहित सभी विपक्षी नेताओं का विरोध है।इसके विपरीत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चोर कहकर संबोधन किसी भी नजरिए से उचित नहीं है।
यह तथाकथित प्रगतिवादी नेता भारतीय सेना की दोनों सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध कर सबूत मांग रहे है।अविव्यक्ति की आजादी की आड़ में नंगा नाच रहे हैं।सेना जा मनोबल कमजोर कर रहे हैं।इन नेताओं ने 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध मे बंदी बनाये गए पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा छोड़ दिये जाने पर आज तक सवाल नहीं उठाया है।कश्मीर के 5 लाख पंडितों के पलायन,कत्ले आम,महिलायों से दुष्कर्म,शाहरुख खान द्वारा पाकिस्तान की संकट की घड़ी में 50 करोड़ दान देने,पाकिस्तान के सम्मान से नवाजने,पाकिस्तान द्वारा हमारे सैनिकों के सिर काटकर ले जाने,कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को सरकारी धन से वर्षो पालने,सौ करोड़ सालाना खर्च कर सुरक्षा मुहैया कराने,मनमोहन सिंह,सोनिया गांधी के घर अलगाववादी नेताओं की दावत,सेना पर पत्थर फेंकने वाले कश्मीरी मुसलमानों, मेहबूबा मुफ़्ती,फारूख अब्दुल्ला के देश विरोधी बयानों,जे एन यूनिवर्सिटी में देश विरोधी नारे लगने पर सवाल नही उठाये हैं।देश में दर्जनों उदाहरण हैं,जहाँ देश हित के मामले में इन तथाकथित प्रगतिवादी नेताओं ने चुप्पी साधी है।

राजनीति के लिए सेना पर अंगुली उठाना,व्यक्ति नहीं प्रधानमंत्री को चोर कहना अपराध है।व्यक्ति का विरोध और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर अनर्गल आरोप लगाकर अपना कद बढ़ाने की जुगत में चंद जयचंद लगे हुए हैं।देश हित मे मुसीबत के समय एकजुट होना वक्त का तकाजा और जरूरत है।
,,लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं,,

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