राजनीति के माहिर खिलाड़ी दिग्विजय सिंह मैदान में

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बुरा जो देखन मैं चला,,,।

भोपाल लोकसभा सीट पर मुकाबला होगा दिलचस्प राजनीति के माहिर खिलाड़ी दिग्विजय सिंह मैदान में भोपाल।चुनाव चाहे लोकसभा का हो,विधान सभा का हो।नगरीय निकाय का हो अथवा पंचायत का हो।हर चुनाव में महाभारत के युद्ध को दोहराया जाता है।महाभारत में खून के रिश्ते के भाइयों के बीच युद्ध हुआ था। सौ कौरव और पांच पांडव चचेरे भाई थे।महाभारत के युद्ध में सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि युद्ध सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक होता था।सूर्यास्त के बाद कौरव और पांडव एक दूसरे के शिविरों में आकर न सिर्फ हालचाल पूछते थे,वरन मरहम पट्टी भी करते थे।इस बार के लोकसभा चुनाव में भी महाभारत का युद्ध दिखाई दे रहा है।एक ही दल के नेता भलमनसाहत की दुहाई देते हुए एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे हुए हैं।प्रत्याशी चयन के लिए पैनल में नाम हटवाने से लेकर टिकट कटवाने तक नेता आपस मे उलझे हुए हैं।मप्र की 29 लोकसभा सीट के होने वाले चुनाव में कांग्रेस, भाजपा में यही दृश्य नजर आ रहा है मप्र में कांग्रेस,भाजपा में नाम कटवाने,जुड़वाने का खेल जारी है।कांग्रेस और भाजपा के अतिरिक्त अन्य दलों का वजूद न होने के बराबर है।मप्र के प्रमुख संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा ने अधिकांश प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।कुछ संसदीय क्षेत्र हैं,जहां कांग्रेस अपने प्रतिद्वंदी दल भाजपा और भाजपा अपने प्रतिद्वंदी दल के मुकाबले प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही हैं।मप्र की राजधानी भोपाल संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठापूर्ण सीट है।कांग्रेस पिछले 30 साल से भोपाल की सीट नहीं जीत पाई है।कांग्रेस ने इस बार भोपाल सीट अपनी झोली में डालने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तथा कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह पर दांव खेला है।दिग्विजय सिंह पिछले 15 साल से कोई भी चुनाव नहीं जीत पाए हैं।दिग्विजय सिंह राजगढ़ से सांसद भी रह चुके हैं।इसलिए दिग्विजय सिंह सबसे आसान और जीत के लिए सुनिश्चित सीट राजगढ़ से लड़ना चाहते थे। राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को भोपाल की सीट से लड़ाने के लिए यह पैंतरा आजमाया कि दिग्विजय सिंह भोपाल,इंदौर,जबलपुर सहित ऐसी कठिन सीट से लड़ें, जहां बरसों से कांग्रेस जीत नहीं पा रही है।कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मुख्यमंत्री कमलनाथ की बात का समर्थन कर दिया।राजगढ़ से चुनाव लड़ने का मन बना चुके दिग्विजय सिंह मन मसोसकर रह गए।यह मामला अंतिम निर्णय के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सौंप दिया गया।राहुल गांधी ने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुफीद मानते हुए भोपाल लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया। दरअसल मप्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह कहा जाने लगा था कि मुख्यमंत्री भले ही कमलनाथ हो लेकिन सुपर सी एम दिग्विजय सिंह ही है।सरकार बनने के बाद मंत्रियों की सूची तैयार करने,विभागों का बंटवारा करने,भाजपा की सरकार के दौर के आई ए एस,आई पी एस सहित अन्य अधिकारियों के थोकबंद तबादले करवाने,अपने पुत्र को मंत्री बनवाने से लेकर सरकार के हर फैसले में दखल देने का आरोप दिग्विजय सिंह पर लगता रहा है।भाजपा तो खुलकर सुपर सी एम होने का आरोप लगा चुकी है। अपने बयानों से हमेशा विवादों में रहने वाले दिग्विजय सिंह को राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है।मुसलमानों की तरफदारी कर आर एस एस को हिन्दू आतंकवादी संगठन बताने वाले दिग्विजय सिंह खूंखार आतंकी ओसामा को ओसामा जी, हाफिज सईद को हाफिज साहब कहकर,जाकिर को गले लगाकर बधाई देने के कारण विवाद में आ चुके हैं। हिन्दू विरोधी छवि को सुधारने के लिए दिग्विजय सिंह नर्मदा नदी की 33सौ किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं।मप्र में 10 साल तक मुख्य मंत्री रहने के बाद पानी, बिजली,सड़क की विकराल समस्या,28 हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की नाराजगी के चलते 2003 में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।चुनाव हारने के बाद दिग्विजय सिंह ने 10 वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था।2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दिग्विजय सिंह फिर सक्रिय हो गए हैं। भोपाल लोकसभा में 21 लाख 2 हजार मतदाता है। भोपाल जिले में 19लाख,सीहोर में 1लाख 94 हजार मतदाता हैं।इसमें साढ़े 4 लाख मुस्लिम,4 लाख पिछड़ा वर्ग,पौने 4 लाख ब्राम्हण,1 लाख 20 हजार क्षत्रिय,1 लाख 20 हजार अनुसूचित जाति और 70 हजार अनुसूचित जानजाति के मतदाता हैं। वर्तमान भाजपा सांसद आलोक संजर ने वर्तमान मंत्री पी सी शर्मा को 2014 के लोकसभा चुनाव में 3 लाख 70 हजार मतों से हराया था।अब चूंकि दिग्विजय सिंह मैदान में हैं और भाजपा भी उनकी टक्कर का उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी में हैं।इस बार मुकाबला दिलचस्प और चौकाने वाला होगा। ,,लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं,,

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