तिल तिल कर मर रही नदी गोदावरी।

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बुरा जो देखन मैं चला,,,,।

तिल तिल कर मर रही नदी गोदावरी।

राम मोहन चौकसे

नाशिक। रात्रि के 11 बजे जैसे ही पवित्र नगरी नाशिक रेलवे स्टेशन पर कदम रखा कि नन्हीं नन्हीं बूंदों ने स्वागत की झड़ी लगा दी।ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति ने पुष्प की जगह पावस ऋतु की अमृतमयी बूंदों से किंचन कर पवित्र कर दिया हो।मुम्बई से भोपाल और भोपाल से मुम्बई जाते समय दर्जनों बार नाशिक नगरी के दर्शन किए। यह 1997 का समय था, जब नवभारत के मुम्बई संस्करण के शुभारंभ पर मेरी सेवाएं मुम्बई संस्करण को सौंप दी गई थी। इस पवित्र नगरी से सुनहरी यादें भी जुड़ी हैं।मेरी बड़ी चचेरी बहन ब्याह के बाद वर्षों इसी नगरी में रही।अब बहन और बहनोई दोनों इस दुनियां में नहीं हैं।उनके जीवित रहते कभी आने का मौका नही मिला।नाशिक नगरी का अपना महत्व है।पवित्र गोदावरी नदी के किनारे बसी इस नगरी में मोक्ष प्राप्ति के लिए सैंकड़ों लोग अपने परिजनों की अस्थि विसर्जन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए यहां आते है।इस पवित्र नगरी का हरिद्वार, प्रयागराज,वाराणसी,उज्जयनी,तथा नर्मदा किनारे बसी पवित्र नगरों की तरह महत्व है। पंचवटी इस नगरी की पहचान है। महाभारत और रामायण काल मे भी पंचवटी का उल्लेख है। प्रकृति की हरितिमा से आच्छादित नाशिक नगरी में प्राचीनतम ऐतिहासिक भवनों से गगनचुम्बी इमारते होड़ लगाती सी नजर आती हैं। परिवहन के लिए यहां बसों,टैक्सी,ऑटो की बहुतायत है। नाशिक से 32 किमी की दूरी पर ज्योतिर्लिंग त्रयंबकेश्वर तथा 92 किमी की दूरी पर पवित्र शिरडी धाम स्थित है। पंचवटी में रामघाट पवित्र गोदावरी नदी के किनारे स्थित है।मप्र के ओंकारेश्वर का आभास करने वाले रामघाट में मंदिरों की श्रृंखला है।इन मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व का इस बात से अंदाज लगाया जा सकता है कि कुछ मंदिर 6 सौ बरस से ज्यादा पुराने है। रामघाट में गोदावरी नदी के दोनों किनारे मंदिर हैं। आवागमन के लिए पैदल पुल और वाहनों के लिए पुल है।रामघाट के दोनों तरफ कई समाजों की धर्मशालाएं हैं।संकरी और पक्की गालियां सुबह से देर रात तक आबाद रहती हैं। रामघाट पर पूजन सामग्री, फल,सब्जी,वस्त्र,मेवे की दुकानें किसी मेले का दृश्य पैदा कर देती हैं। पंचवटी से सभी दर्शनीय स्थल जुड़े हैं। 150 किमी दूर स्थित शनि शिंगणापुर, 92 किमी दूर स्थित शिरडी धाम, 32 किमी दूर स्थित ज्योर्तिलिंग त्र्यम्बकेश्वर तथा 65 किमी दूर स्थित सप्तश्रृंगी गढ़ को छोड़ दिया जाए तो राम कुंड,भक्ति धाम, अक्षरधाम,वेद मंदिर,मुक्तिधाम, सीता गुफा, कपालेश्वर मंदिर,तपोवन,कालाराम मंदिर, श्री राम रथ,सोमेश्वर,इंद्रकुण्ड तथा काया मारुति 3 से 10 किलोमीटर की दूरी पर हैं। नाशिक में मन को भाने वाले धार्मिक,रमणीक स्थल होने के बाद सबसे चिंताजनक और मन को दुःखी करने वाली बात यह है कि पवित्र गोदावरी नदी शनै शनै मृत्यु की कगार पर पहुंचती जा रही है। यह सुखद है कि रेत उत्खनन जैसी बात नाशिक में नहीं है।पक्के घाटों के बीच गोदावरी नदी अपना अस्तित्व बचाते निर्बाध गति से बह नहीं पा रही है। कहीं कहीं कुंड में तब्दील होती जा रही हैं।गंदगी इतनी है कि नदी के पानी का पूरा रंग काला दिखाई देता है। प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा विसर्जित की जाने वाली सामग्री,पालीथिन पानी पर तैरती रहती है।पवित्र गोदावरी नदी में स्नान तो दूर आचमन करने से डर लगता है।रामघाट के किनारे बसे घरों की निकासी का पानी भी गोदावरी में समाहित हो रहा है। हिंदुत्व और धर्म के नाम पर चुनाव जीतकर सरकार चलाने वाली भाजपा,शिवसेना के आमदार, खासदार,संसद,मंत्री, नेता, अभिनेता गोदावरी को तिल तिल मरता हुआ देख रहें है।गंगा,यमुना,नर्मदा की तरह गोदावरी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।सरकार से लेकर स्वमसेवी संस्थाओं के फोटो खिंचवाने वाले पदाधिकारी,समाज सेवी गोदावरी नदी के शुद्धिकरण के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। नाशिक नगरपालिका के दो कचरा वाहन रामघाट पर खड़े रहते हैं।कचरा फेंकने वाले कचरा वाहन में कचरा डाले अथवा गोदावरी नदी में फेंके।कोई रोकने वाला नहीं है। धार्मिक पुराणों में गंगा,यमुना, नर्मदा की तरह गोदावरी का उल्लेख है।दैनिक पूजा पद्धति से लेकर विवाह के पवित्र बंधन के मंत्रोच्चार में गोदावरी का उच्चारण होता है।महाराष्ट्र सरकार,केंद्र सरकार,पर्यावरण प्रेमी, समाजसेवियों,स्वनामधन्य समाजसेवी संस्थानों के लिए यह चेतावनी और खतरे की घंटी है कि तिल तिल कर मर रही है नदी गोदावरी। ,,लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं,,

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