निजी गोदाम का शेड उडऩे से साढ़े 8 हजार मीट्रिक टन गेहूं भीगने से हुआ खराब, मामले को रफा-दफा करने के प्रयास

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भोपाल  उपाजिज़्त गेहूं के भंडारण में लापरवाही के चलते समीपस्थ ग्राम निपानिया जाट के एक निजी गोदाम में रखा करीब 8500 मीट्रिक टन गेहूं बारिश में भीगने से नष्ट हो गया है। इसकी कीमत करीब 18 क रोड़ है। खास बात यह,कि इस मामले को मैदानी अमला अपने स्तर पर रफ ा-दफ ा करने की जुगत में है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, वाक्या गत 29 जून का है। तब तेज हवा के साथ हुई बारिश से निपानिया जाट स्थित तीन गोदामों में से एक का शेड उखड़ कर दूर जा गिरा। बारिश का पानी गोदाम में भर गया। इससे यहां रखा करीब साढ़े आठ हजार मीट्रिक टन गेहूं  को  नुकसान पहुंचा। इसकी कीमत लगभग 18 करोड़ रुपए है। इसकी सरकारी खरीदी समर्थन मूल्य पर किसानों से की गई थी। बाद में इसका भंडारण  मप्र वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा उक्त अनुबंधित गोदाम में किया  गया,लेकिन भंडारण से पहले गोदाम की जांच नहीं किए जाने से पहली ही बारिश में गोदाम का शेड़ तेज हवा में उड़ गया और गेहूं को नुकसान पहुंचा।

बोरों में अंकुरित हो गए गेहूं, लगी फफूंद

बताया जाता है,कि तीन-चार दिन लगातार हुई बारिश से गोदाम में पानी भर गया। आलम यह है,कि भीगे हुए कई बोरों में  न के वल फ फूंद लग गई है बल्कि गेहूं अंकुरित भी हो गए। वहीं कई बोरों में रखा अनाज सडऩे से गोदाम में बदबू फैल रही है। बावजूद इसके खराब व अच्छे गेहूं को अलग नहीं किया गया। सूत्रों का दावा है,कि बीमा कंपनी से मुआवजा पाने के लिए गोदाम व खराब हुए अनाज को यथास्थिति में रखा गया है।

गांव में प्रदूषण का खतरा

बारिश के कारण कुल कितने गेहूं को नुकसान पहुंचा इसका आंकलन भी प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर करने की बजाए इसका जिम्मा बीमा कं पनी पर छोड़ दिया गया है। आलम यह,कि घटना को एक पखवाड़े से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो खराब गेहूं की मात्रा का आंकलन हो सका  न ही इसका निष्पादन ही किया गया। इससे गांव में प्रदूषण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

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