कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों में मची जूतम पैजार

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उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है…..।

कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों में मची जूतम पैजार


राम मोहन चौकसे
मप्र में नए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ बबाल एक सप्ताह बाद भी नहीं थमा है।अघ्यक्ष की नियुक्ति की आड़ में जूतम पैजार मची हुई है।कांग्रेस के विधायक कांग्रेस के ही मंत्रियों पर रुपये लेकर काम करने का आरोप लगा रहे हैं।सरकार को समर्थन देने वाले गैर कांग्रेस विधायक भी मंत्रियों पर यही आरोप लगा रहे हैं।

वन मंत्री उमंग सिंघार ने कांग्रेस के कद्दावर नेता,राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सिंघार ने दिग्विजय सिंह को ब्लैकमेलर,रेत उत्खनन माफिया,शराब कारोबारी,ट्रांसफर-पोस्टिंग करने वाला तथा पर्दे के पीछे सरकार चलाने वाला षड्यंत्रकारी बता दिया है।दिग्विजय सिंह के समर्थक वनमंत्री का दो बार पुतला जला चुके हैं।ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक उन्हें अध्यक्ष बनने के लिए कांग्रेस कार्यालय पर होर्डिंग लगा चुके है।

वन मंत्री उमंग सिंघार कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिग्विजय सिंह के खिलाफ चिट्ठी लिख चुके हैं।मप्र के प्रभारी दीपक बाबरिया भी सोनिया गांधी को मप्र में चल रहे घमासान,जूतम पैजार,आपसी फूट,अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सोनिया गांधी से अलग अलग मुलाकात कर अपनी बात बता चुके है।ज्योतिरादित्य सिंधिया भी विदेश यात्रा से लौटकर सोनिया गांधी से भेंट करेंगे।

मुख्यमंत्री कमलनाथ खेमे के वन मंत्री उमंग सिंघार ने नए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति होने की खबर के बाद सबसे पहले दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।सिंघार ने आरोप लगाया दिग्विजय सिंह सरकार को अस्थिर कर स्वम को पावर सेंटर के रूप में स्थापित करने में लगे हैं। 2 सितम्बर से शुरू हुआ यह सिलसिला 9 सितम्बर तक जारी रहा।दिग्विजय सिंह पर उमंग सिंघार का खुला आरोप है कि उन्होंने व्यापमं घोटाला, ई टेंडरिंग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा लेकिन सिंहस्थ घोटाले पर चुप्पी साध ली,क्योंकि सिंहस्थ वाले विभाग के मंत्री उनके पुत्र जय वर्धन सिंह है।
दरअसल दिग्विजय सिंह ने 30 अगस्त को सभी मंत्रियों को पत्र लिखकर पूछा था ,उनके द्वारा लिखे गए तबादला और पदस्थापना पत्र पर क्या कार्यवाही हुई।दिग्विजय सिंह ने मंत्रियों से मिलने का समय भी मांगा था।इस पत्र को पढ़कर मंत्रियों को आश्चर्य हुआ था।इस चिट्ठी के बाद से ही उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह पर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने,पावर सेंटर बनाने का आरोप लगाकर उनकी हैसियत पूछकर मोर्चा खोल दिया।स्वाभाविक था दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने वन मंत्री का दो बार पुतला फूंक डाला।उमंग सिंघार ने उनका पुतला फूंकने के बाद दिग्विजय सिंह पर ब्लैक मेलर, शराब कारोबारी,उत्खनन करने तथा परिवहन विभाग में रुपये लेकर ट्रांसफर -पोस्टिंग करने का आरोप लगा दिया।इसी बीच मप्र में एक ऑडियो वायरल हो गया।जिसमें सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे विहशल ब्लोअर डॉ आनंद राय से कह रहे हैं कि विधायक राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव 20 लाख,वन मंत्री उमंग सिंघार 15 लाख तथा विधायक डॉ हीरालाल अलावा शराब ठेकेदारों से 10 लाख रुपये ले रहे है। बाद में आरोपित तीनो विधायको की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने सहायक आबकारी आयुक्त को हटा दिया।

वन मंत्री उमंग सिंघार ने पूरे सप्ताह दिग्विजयसिंह के खिलाफ बयानबाजी की।मुख्यमंत्री की समझाइश के बाद कुछ शांत रहे।इस बीच नगरीय प्रशासन मंत्री और दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन ने सफाई दी कि
मप्र में एक ही पावर सेंटर कमलनाथ हैं।उन्होंने दावा किया कि सिंहस्थ घोटाले में विधानसभा में उन्होंने क्लीनचिट नहीं दी है।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में मीडिया के समक्ष कहा अवैध उत्खनन बंद नहीं हुआ तो झंडा उठाना पड़ेगा।सिंधिया समर्थक विधयक कमलेश जाटव तथा रणवीर जाटव ने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट पर पुत्र के माध्यम से रुपये लेकर काम करने का आरोप लगा दिया । तुलसी सिलावट भी सिंधिया समर्थक हैं।सिंधिया की डांट के बाद विधायक द्वय रणवीर और कमलेश जाटव अपने बयान से पलट गए।
सपा के इकलौते विधायक राजेश शुक्ला ने भी गृह मंत्री बाला बच्चन,स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल सहित 12-13 मंत्रियों पर आरोप लगा दिया कि बिना लिफाफा लिए वे काम नहीं करते।कांग्रेस विधायक गिर्राज दंडोतिया,बाबूलाल जंडेल,महेश परमार ने मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।मप्र में मचे घमासान के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ को कहना पड़ा भाजपा सरकार में कई पावर सेंटर थे,जो रिमोट से चलते थे।कांग्रेस में ऐसा नहीं है।
दिग्विजय सिंह के खास समर्थक,पूर्व प्रवक्ता मानक अग्रवाल ने वन मंत्री उमंग सिंघार को भाजपा का एजेंट बताया है।दिग्विजय सिंह ने भी इंदौर के एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार में उनका दखल नहीं है। मप्र में मचे निम्न स्तरीय घमासान की शिकायत श्रीमती सोनिया गांधी से होने के बाद मामला जांच के लिए अनुशासन समिति को सौंप दिया गया है।समिति के अध्यक्ष ए के एंटोनी अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपेंगे।इस रिपोर्ट के बाद मप्र में नए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति होगी।ऐसी संभावना है कि मप्र मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा।कुछ मन्त्रियों की राजनैतिक बलि चढ़ेगी।इस पूरे घटनाक्रम में वनमंत्री उमंग सिंघार द्वारा कहा गया शेर चर्चा में है-उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है।गर जिंदा हो फिर जिंदा नजर आना जरूरी है।
( लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं राज्य शासन से अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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