हादसों से सबक नहीं लेने की सजा

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विशेष संपादकीय

राम मोहन चौकसे

राजधानी भोपाल में आज अलसुबह हुए हादसे ने पूरे भोपाल को झकझोर कर रख दिया।भोपाल के खटलापुरा घाट पर गणेश जी की प्रतिमा विसर्जन करते समय नाव पलटने से 12 युवकों की जीवित जल समाधि हो गई।5 को बचा लिया गया।2 युवक अभी लापता हैं।राजधानी में यह मनहूस खबर जंगल की आग की तरह फैल गई।पुराने हादसों से सबक नहीं लेने की सजा उन पीड़ित परिवारों को मिली है,जिनके घर का चराग बुझ गया।दुर्घटना के बाद अब लाठी पीटी जा रही है।राजनेताओ को मातम में भी राजनीति नजर आ रही है।यह दुर्घटना जिला,पुलिस और नगर निगम की घनघोर लापरवाही का नतीजा है।दुर्घटना स्थल पुलिस मुख्यालय से चंद कदम की दूरी पर है।यही पुलिस महानिदेशक जेल,पुलिस ऑफिसर मेस,पुलिस कर्मियों के क्वार्टर,7 वी बटालियन का दफ्तर, आई जी एस ए एफ का दफ्तर है।यही आपदा प्रबंधन संस्थान का दफ्तर है।कुल जमा यहां 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है।त्योहारों पर विशेष व्यवस्था की पोल इस हृदय विदारक हादसे ने खोल दी है।भोपाल में गणेश जी और दुर्गा जी की मूर्तियों के विसर्जन के लिए सिर्फ प्रेमपुरा घाट भदभदा  एवं धोबीघाट छोटा तालाब जिला प्रशासन द्वारा अधिकृत किये गए है।खटलापुरा में गणेश जी विशाल प्रतिमा के साथ विसर्जन की अनुमति किसने दी।छोटी सी नाव पर विशाल प्रतिमा के साथ 19 युवकों को बैठने के लिए किसी ने नहीं रोका।मौत के गाल में समा गए यूवको के मन मे भी ख्याल नहीं आया कि प्रतिमा को विसर्जित करते समय संतुलन बिगड़ेगा।राजधानी के संत हिरदाराम नगर(बैरागढ़) में 6 वर्ष पूर्व प्रतिमा विसर्जन करते समय  5 भाइयों की बड़ी झील में डूबने से मौत हो गई थी।इतने बड़े हादसे के बाद सख्ती बरतने, मृतकों के परिवारजनों को 4-4 लाख रुपये देने,मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा न्यायिक जांच का आश्वासन देने से हालात सुधरने वाले नहीं है।क्यों नही जिला,पुलिस,नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित करने की घोषणा की गई। देश के प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जब रेल मंत्री थे,तब सिर्फ एक रेल दुर्घटना होने पर उन्होंने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।ऐसा नैतिक साहस आज के दौर में कोई नेता दिखा सकता है।आने वाले समय मे फिर नवरात्रि महोत्सव है।नवरात्रि पर्व के समापन पर भी प्रतिमा विसर्जित की जाती हैं। अब कोई चूक न हो इसका ध्यान रखना चाहिए। माँ-बाप भी इसका ध्यान रखें कि उनकी संतान हादसों वाली जगह  ना जाएं।मुआवजा देने से,राजनैतिक रोटी सेकने से मरने वाले के परिवार के आंसू नहीं पोंछे जा सकते।यह भी जरूरी है दोषी अधिकारियो को सजा मिले,ताकि दूसरे सबक ले सकें।

(लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य सेआतंत्र पत्रकार हैं)

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