आधुनिक बौद्धिक जुगाली केंद्र

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व्यंग्य

आधुनिक बौद्धिक जुगाली केंद्र

राम मोहन चौकसे
जुगाली मूलतः चार पांव वाली गाय और भैंस द्वारा की जाने वाली ईश्वर प्रदत्त क्रिया है। जिसमे पालतू जानवर द्वारा ठूंस ठूंस कर पेट की थैली में भोजन संग्रहित कर इच्छानुसार किश्तों में चबाया जाता है। दो पैर वाला आदमी भोजन की जुगाली नहीं कर सकता है। ऊपर वाले ने इसकी व्यवस्था नहीं की है,इसलिए वह बौद्धिक जुगाली करता है। वक्त के साथ बौद्धिक जुगाली का तरीका भी बदला है। पहले गांवों के चबूतरे, बड़ी हवेलियों में बौद्धिक जुगाली केंद्र हुआ करते थे।खेतों की मेढ़,कुएं की जगत,पनघट भी बौद्धिक जुगाली केंद्र बन जाया करते थे। बदलते दौर में बौद्धिक जुगाली के लिए नगरों, महानगरों में केंद्र खुले हुए हैं।इन केंद्रों को काफी घर कहा जाता है। जिस नगर में ऐसे काफी घर नहीं है।वहां चाय की गुमठियों के चबूतरे,लकड़ी,लोहे के बेंच,केश कर्तनालय, पान की दुकानें बौद्धिक जुगाली केंद्र बन जाते है।
बौद्धिक जुगाली पढ़ा -लिखा,अनपढ़ दोनों कर सकते हैं। बौद्धिक जुगाली का इतिहास सदियों पुराना है। दिल्ली,मुम्बई के बौद्धिक जुगाली केंद्र(काफी घर) अपना इतिहास बना चुके हैं। हमारे देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने दिल्ली के काफी घर मे बरसों अपना समय व्यतीत किया था।बौद्धिक जुगाली करने वालों की जमात में कवि, लेखक,पत्रकार,साहित्यकार, नाट्यकर्मी, शिक्षक,व्यवसायी,अधिकारी,कर्मचारी शामिल हैं।कंठ लंगोट(टाई)लगाने वाला अधिकारी बौद्धिक जुगाली केंद्र में जाने से हिचकता है।कर्मचारी सिर्फ मंहगाई, मंहगाई भत्ते,एरियर्स,पेंशन की चर्चा करता है।
बौद्धिक जुगाली करने वालों की अलग -अलग श्रेणियां होती है।यह श्रेणियां अल्प ज्ञानी,ज्ञानी और अति ज्ञानी की होती है।अल्प ज्ञानी सिनेमा, टी वी सीरियल, नारी सौंदर्य की चर्चा करता है। ज्ञानी समाज मे घटने वाले घटनाक्रम,देश की गतिविधियों पर अपना बौद्धिक देने में रुचि रखता है। अति ज्ञानी दो प्रकार के होते है।पहले प्रकार के अति ज्ञानी राजनीति की चिंता में डूबे रहते हैं। प्रदेश से लेकर देश के विधायक, सांसद, मंत्री, प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री बनाने और उन्हें पद से हटाने की भविष्यवाणी करने में उनके 18 घण्ठे गुजरते है।दूसरे प्रकार के अतिज्ञानी एक विशेष विचारधारा पर ही बौद्धिक जुगाली करते रहते हैं। इन्हें अवार्ड वापसी गैंग का सदस्य माना जाता है। इस प्रकार के अतिज्ञानी देश के खिलाफ जहर उगलकर स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं।कवच धारण करना इन्हें पसंद है। कवच किसी भी धातु का हो सकता है।इनकी बौद्धिक जुगाली से लगता है कि सबसे बड़े दुश्मन देश पाकिस्तान की आवाज बुलंद करने का इन्होंने ठेका ले रखा है।देश की खुली हवा में इनका दम घुटता है। उस पर तुर्रा यह कि देश की सभी ट्राफियां इनके ड्राइंग रूम में सजी रहे। पुरस्कार और सम्मान हासिल करने में इन्हें महारत है।
बौद्धिक जुगाली का स्तर हमेशा एक जैसा नहीं रहता है।यह स्तर कभी -कभी इतना गिर जाता है कि इनकी डिग्रियों को अनपढ़ भी मुंह चिढ़ाता है। आमतौर पर महिलाएं बौद्धिक जुगाली में कम रुचि दिखाती है।उनकी बौद्धिक जुगाली परिवार के इर्द गिर्द होती है। बौद्धिक जुगाली में सभी रसों का रसास्वादन होता है।जिसमे निंदा रस प्रिय विषय होता है। मेरे जैसे लोग बौद्धिक जुगाली से इसलिए मुक्त हैं क्योंकि बौद्धिक जुगाली में बुद्धि जरूरी होती है।जो अपने पास नहीं है।
(लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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