साहब का श्वान प्रेम

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व्यंग्य
साहब का श्वान प्रेम


राम लाल जी हैं तो ठेठ देशी लेकिन अंग्रेजियत का भूत चौबीस घण्ठे सवार रहता है। इसलिए खुद को आर एल जी साहब कहलाना पसंद करते हैं।साहब नहीं कहने पर बुरा मान जाते हैं। वर्षों पहले बंद हो चुके अंग्रेजी अखबार का पत्रकार बताने वाले आर एल जी पूरे मोहल्ले में ढींग हांकने में उस्ताद माने जाते हैं। उनकी सीधी और नेक पत्नी सरकारी दफ्तर में मुलाजिम हैं।पत्नी के नाम शासकीय आवास है। आर एल जी रहने और खाने की चिंता से मुक्त हैं। साल के 12 महीने सिर के खिचड़ी बाल,दाढ़ी, मूंछ को विभिन्न शैली में सजाने वाले आर एल जी अंग्रेज जैसी टोपी पहनना पसंद करते हैं।
अंग्रेजियत के चलते घर मे एक विदेशी कुत्ता भी पाल रखा है। कुत्ते को सुबह-शाम नैसर्गिक क्रिया के लिये दो तीन किलोमीटर घुमाना आर एल जी की दिनचर्या में शामिल है। कुत्ता घुमाते समय अंग्रेजों जैसा छोटा सा डंडा हाथ मे रखना नहीं भूलते हैं।सर्दी अभी शुरू हुई थी। हर दिन की तरह आर एल जी कुत्ता घुमाने निर्धारित मार्ग की जगह दूसरे मुख्य मार्ग पर निकले।मुख्य मार्ग पर देशी कुत्तों का झुंड बैठा था। देशी कुत्तों ने पहली बार अजनबी विदेशी कुत्ते को देखा। देशी कुत्तों को बहुत नागवार गुजरा कि उनके मोहल्ले में विदेशी कुत्ता।देशी कुत्तों ने भौंककर विरोध जताया। आर एल जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया। उन्होंने हाथ के डंडे से देशी कुत्तों को भगाने का प्रयास किया।एक देशी कुत्ता बगावत पर उतारू हो गया। बागी देशी कुत्ते ने आर एल जी के कुत्ते को टांग से पकड़ने का प्रयास किया। आर एल जी ने हाथ के डंडे से देशी कुत्ते के सिर पर जोर से प्रहार कर दिया।
बागी देशी कुत्ते ने अन्य साथियों को आवाज देकर विदेशी कुत्ते को चारों ओर से घेर कर हमला कर दिया। हमला होने से बुरी तरह घबराया विदेशी कुत्ता जान बचाकर भागा।कुत्ते का पट्टा आर एल जी ने कसकर पकड़ रखा था।कुते का पट्टा आर एल जी के पांव में जा फंसा।आर एल जी कुछ दूर तक सड़क पर घिसटे। आर एल जी की टोपी,डंडा सब दूर जा गिरे।देशी कुत्तों ने आर एल जी को सड़क पर लुढ़का-लुढ़का कर काटा।आर एल जी के हाथ,पैर, पैर की पिंडली,पेट,पीठ गाल में देशी कुत्तों ने अपने गहरे निशान अंकित कर दिए। राहगीरों ने जैसे तैसे आर एल जी को बचाया और अस्पताल में जमा कराया।
इधर विदेशी कुत्ता जान बचाकर घर पहुंचा।बिना आर एल जी के पट्टा घसीटकर आए कुत्ते को देखकर आर एल जी की पत्नी को समझने में देर नहीं लगी कि अनहोनी हो चुकी है। मोहल्ले के दो किशोरों को लेकर आर एल जी की पत्नी घटना स्थल पर पहुंची। वहां जाकर पता चला कि वे अस्पताल में जमा हैं। अस्पताल में डॉक्टरों ने श्वान दंश निरोधी इंजेक्शन लगाकर पट्टी बंधन कर दी।शरीर मे आंख,हाथ के पंजों को छोड़कर पूरे शरीर मे पट्टी बंधी थी। आर एल जी पड़ोसियों ने अस्पताल जाकर तसल्ली देते हुए कुत्तों से पंगा नहीं लेने की सीख दी।
अस्पताल में भर्ती हुए अभी 48 घण्ठे भी नहीं गुजरे थे कि आर एल जी ने लेटे-लेटे अपनी सेल्फी लेकर श्वान दन्त दंश की कथा शब्दों में पिरोकर सोशल मीडिया पर परोस दी। अस्पताल में देखने वालों की संख्या पहले से बढ़ गई।अब आर एल जी ने मिलने वालों से कहना शुरू कर दिया कि किसी बड़े नेता को लेकर आओ। आठ दिन बाद एक पार्षद एक बड़े नेता को लेकर आ गया।बड़े नेता सत्तारूढ़ दल से जुड़े थे।आर एल जी ने आठ दिन की दवाओं पर हजारों का खर्च बताकर मुख्यमंत्री के नाम आर्थिक मदद का आवेदन पत्र नेता जी की थमा दिया। 15 दिन बाद आर एल जी को मुख्यमंत्री कोष से एक लाख रुपए का चेक मिल गया। आर एल जी अब स्वस्थ होकर घर लौट आएं हैं। आर एल जी उन देशी कुत्तों को मन ही मन धन्यवाद दे रहे हैं,जिनके दंत दंश से एक लाख रुपए मिल गए।आर एल जी अब प्रार्थना कर रहे हैं। साल में दो बार कुत्ता जरूर काटे।
(लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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