वतन की माटी माँ के समान है

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बुरा जो देखन मैं चला….।

राम मोहन चौकसे
विगत सप्ताह एक दैनिक समाचार पत्र में छपी एक खबर ने मन को तरंगित कर दिया।राष्ट्र प्रेम की भावना को और प्रज्ज्वलित कर दिया।छोटी लेकिन सारगर्वित खबर का लुब्बे लुबाब यह था कि अमरीका मूल का निवासी एक युवक नौकरी के सिलसिले में दूसरे देश मे निवास कर रहा है।इस युवक दंपति के यहां पहली संतान जन्म लेने वाली है।नौकरी में अवकाश नहीं मिलने के कारण अमरीकी युवक संतान उत्पत्ति के अपने वतन नही जा पा रहा है।अमरीकी युवक की इच्छा है कि संतान देश की माटी में ही जन्म ले।काफी ऊहापोह के बाद युवक के मन मे विचार आया।उस युवक ने अमरीका में रहने वाले अपने पिता को अपने विचार से अवगत कराते हुए देश की माटी हवाई मार्ग से भिजवाने का निवेदन किया।पिता ने सहर्ष स्वीकृति देते हुए देश की मिट्टी व्यवस्थित रूप से पुत्र को भिजवा दी।युवक ने अस्पताल के प्रतिबंध को ध्यान रखते हुए अपने मकान के शयन कक्ष में देश की मिट्टी को बिछाकर प्रसव कराने की तैयारी कर ली है।

हमारे देश भारत मे भी बिहार स्थित भागलपुर जिले के ध्रुवगंज में रहने वाले 19 वर्षीय गोपाल तीन बार नासा का ऑफर ठुकरा चुके हैं।अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के न्यौते की ठुकराकर देश के शोध करने पर अडिग हैं।गोपाल का कहना है,देश की सेवा करना मेरा लक्ष्य है।गोपाल ने हर साल 100 बच्चों की मदद करने का फैसला किया है।दसवीं की पढ़ाई करने के बाद 2013-14 में गोपाल ने बायो सेल का अविष्कार किया।इस अविष्कार के लिए गोपाल को इंस्पायर्ड अवार्ड मिला।गोपाल 12वीं की पढ़ाई करने के बाद देहरादून के गवर्नमेंट आफ इंडिया के ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट की प्रयोगशाला में शोध परीक्षण कर रहे हैं।2008 में बाढ़ आने पर गांव में सब कुछ बर्बाद हो गया। गोपाल के पिता ने 10 वीं के बाद नहीं पढाने की मजबूरी बताई। देश के लिए मर मिटने और कुछ करने का जज्बा रखने वाले गोपाल ने हिम्मत नहीं हारी।गोपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।प्रधानमंत्री ने गोपाल को एन आई एफ अहमदाबाद भेजा।अहमदाबाद में गोपाल ने 6 अविष्कार कर अपना नाम दुनिया के शीर्ष 30 स्टार्टअप वैज्ञानिकों में जुड़वा लिया।अप्रैल माह में अबूधाबी में होने वाले दुनियाँ के सबसे बड़े विज्ञान मेले में गोपाल मुख्य वक्ता होंगे।इस विज्ञान मेले में 6 हजार वैज्ञानिक भाग लेंगे।गोपाल बेकार कागज से बायोसेल,केले के तने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक निर्माण, हाइड्रोइलेक्ट्रिक बायोसेल जैसे अनेक अविष्कार कर चुके है।

वतन की माटी से प्रेम के दो उदाहरण ही उन लोगो की आंखे खोलने के लिए काफी हैं।जो पीढियां और दशकों गुजर जाने के बाद भी देश की माटी से प्यार नहीं करते हैं। भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाते हैं।अफजल गुरु हम शर्मिंदा है,तेरे कातिल जिंदा हैं के नारे में सुर मिलाते हैं।कश्मीर की आजादी के नारे
लगाकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने में शर्म की जगह गर्व महसूस करते है।संविधान की दुहाई देकर आसाम को देश से अलग करने की मांग करते हैं।ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं,जब देश के खिलाफ जहर उगलने वाले आस्तीनों के सपोले फुफकारते रहते हैं।मौका मिलने पर दंश देने में पीछे नहीं रहते हैं।देश को बेचने वालों में जम्मू कश्मीर के बर्खास्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी देवेंदर सिंह भी शामिल हैं।जो आतंकवादियों को पनाह देने,संरक्षण देने,पाकिस्तान के लिए जैश ए मोहम्मद की वर्षों से जासूसी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद बंदी बनाये जाने पर एनआई ए की जांच में हैं।
वतन की माटी से प्रेम के लिए दिखावेे की जरूरत नहीं हैं।शून्य तापमान से 50 अंश नीचे,50 अंश तापमान वाली झुलसा देंने वाली गर्मी,समुद्री क्षेत्र में घुटने तक कीचड़ में डूबकर सेना की गश्त करने हमारे वीर सैनिक सिर्फ देश के लिए 24 घंटे ततपर रहते है।शहीदों की शहादत पर देश की सभी सुख सुविधा भोगने वाले चंद देश विरोधी कुकरमुत्तों को यह सीखना पड़ेगा कि इस देश की माटी को नमन करने में ही भलाई है।उस माटी को नमन करना ही पड़ेगा,जिस माटी में जन्म लिया है।
(लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं राज्य स्तरीय अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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